Friday, October 22, 2021

करवा चौथ का व्रत, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, चांद निकलने का समय और सामग्री सूची

करवा चौथ का व्रत, शुभ मुहूर्त, चांद निकलने का समय और सामग्री सूची

हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष में चतुर्थी तिथि के दिन करवा चौथ पर्व मनाया जाता है। करवा चौथ का व्रत सुहागन स्त्रियों के लिए बहुत खास होता है। मान्यतानुसार इस दिन अगर सुहागिन महिलाएं व्रत-उपवास रखें तो उनके पति की आयु लंबी होती है और गृहस्थ जीवन सुखी रहता है। चांद निकलने के बाद महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं और अपने पति के हाथ से पानी पीकर व्रत को संपन्न करती हैं। इस व्रत में सायंकाल के समय शुभ मुहूर्त में चांद निकलने से पहले पूरे शिव परिवार की पूजा की जाती है।

सामग्री सूची

1. चंदन
2. शहद
3. अगरबत्ती
4. पुष्प
5. कच्चा दूध
6. शकर
7. शुद्ध घी
8. दही
9. मिठाई
10. गंगाजल
11. कुंकुम
12. अक्षत (चावल)
13. सिंदूर
14. मेहंदी
15. महावर
16. कंघा
17. बिंदी
18. चुनरी
19. चूड़ी
20. बिछुआ
21. मिट्टी का टोंटीदार करवा व ढक्कन
22. दीपक
23. रुई
24. कपूर
25. गेहूं
26. शकर का बूरा
27. हल्दी
28. पानी का लोटा
29. गौरी बनाने के लिए पीली मिट्टी
30. लकड़ी का आसन
31. चलनी
32. आठ पूरियों की अठावरी
33. हलुआ
34. दक्षिणा के लिए पैसे


करवा चौथ 2021 पूजन के शुभ मुहूर्त-
इस बार करवा चौथ 24 अक्टूबर, दिन रविवार को सुबह 03.01 मिनट से चतुर्थी तिथि प्रारंभ होकर सोमवार, 25 अक्टूबर 2021 को सुबह 05.43 मिनट पर चतुर्थी तिथि समाप्त होगी। इस दिन करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त 24 अक्टूबर को शाम 5.43 मिनट से 6.59 मिनट तक रहेगा। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार रोहिणी नक्षत्र को बेहद शुभ माना जाता है और इस वर्ष शुभ संयोग बन रहा है क्योंकि करवा चौथ का चांद रोहिणी नक्षत्र में निकलेगा।
करवा चौथ व्रत पारण और चंद्रोदय टाइम- अलग-अलग शहरों में चांद निकलने के समय में बदलाव हो सकता है। इस दिन 08.07 मिनट पर चांद के दर्शन हो सकते हैं। उसके बाद करवा चौथ व्रत का पारण किया जाएगा।

चंद्रमा को अर्घ्य देने का मंत्र-

करकं क्षीरसंपूर्णा तोयपूर्णमयापि वा। ददामि रत्नसंयुक्तं चिरंजीवतु मे पतिः॥
इति मन्त्रेण करकान्प्रदद्याद्विजसत्तमे। सुवासिनीभ्यो दद्याच्च आदद्यात्ताभ्य एववा।।
एवं व्रतंया कुरूते नारी सौभाग्य काम्यया। सौभाग्यं पुत्रपौत्रादि लभते सुस्थिरां श्रियम्।।

Tuesday, October 19, 2021

माता के सभी भक्तों के लिए मां तारा रानी की कथा सभी भक्तों से ध्यान से पढ़ें और इसे आगे शेयर करें जय माता दी ।

*तारा रानी की कथा*

माता के जगराते में महारानी तारा देवी की कथा कहने व सुनने की परम्‍परा प्राचीन काल से चली आई है।

बिना इस कथा के जागरण को सम्‍पूर्ण नहीं माना जाता है, यद्यपि पुराणों या ऐतिहासिक पुस्‍तकों में कोई उल्‍लेख नहीं है – तथापि माता के प्रत्‍येक जागरण में इसको सम्मिलित करने का परम्‍परागत विधान है।

कथा इस प्रकार है

राजा स्‍पर्श मां भगवती का पुजारी था, दिन रात महामाई की पूजा करता था । मां ने भी उसे राजपाट, धन-दौलत, ऐशो-आराम के सभी साधन दिये था, कमी थी तो सिर्फ यह कि उसके घर में कोई संतान न थी, यही गम उसे दिन-रात सताता, वो मां से यही प्रार्थना करता रहता था कि मां मुझे एक लाल बख्‍श दो, ताकि मैं भी संतान का सुख भोग सकूं, मेरे पीछे भी मेरा नाम लेने वाला हो, मेरा वंश भी चलता रहे, मां ने उसकी पुकार सुन ली, एक दिन मां ने आकर राजा को स्‍वप्‍न में दर्शन दिये और कहा है, हे राजन, मैं तेरी भक्ति से बहुत प्रसन्‍न हूं, और तुझे वरदान देती हूं कि तेरे घर में दो कन्‍याएं जन्‍म लेंगी।
कुछ समय के बाद राजा के घर में एक कन्‍या ने जन्‍म लिया, राजा ने अपने राज दरबारियों को बुलाया, पण्डितों व ज्‍योतिषों को बुलाया और बच्‍ची की जन्‍म कुण्‍डली तैयार करने का हुक्‍म दिया।
पण्डित तथा ज्‍योतिषियों ने उस बच्‍ची की जन्‍म कुण्‍डली तैयार की और कहा हे राजन, यह कन्‍या तो साक्षात देवी है। यह कन्‍या जहां भी कदम रखेगी, वहां खुशियां ही खुशियां होंगी। यह कन्‍या भी भगवती की पुजारिन होगी, उस कन्‍या का नाम तारा रखा गया, थोड़े समय बाद राजा के घर वरदान के अनुसार एक और कन्‍या ने जन्‍म लिया। मंगलवार का दिन था, पण्डितों और ज्‍योतिषियों ने जब जन्‍म कुण्‍डली तैयार की तो उदास हो गये, राजा ने उदासी का करण पूछा तो वे कहने लगे, महाराज यह कन्‍या आपके लिये शुभ नहीं है, राजा ने उदास होकर ज्‍योतिषियों से पूछा कि मैने ऐसे कौन से बुरे कर्म किये हैं जो कि इस कन्‍या ने मेरे घर में जन्‍म लिया है, उस समय ज्‍योतिषियों ने अपनी ज्‍योतिष लगाकर बताया, कहने लगे कि ये दोनो कन्‍याएं जिन्‍होंने आपके घर में जन्‍म लिया है, पिछले जन्‍म में राजा इन्‍द्र की अप्‍सराएं थीं, इन्‍होंने सोचा कि हम भी मृत्‍युलोक में भ्रमण करें तथा देखें कि मृत्‍युलोक पर लोग किस तरह रहते हैं, दोनो ने मृत्‍युलोक पर आ एकादशी का व्रत रखा, बड़ी बहन का नाम तारा था, छोटी बहन का नाम रूक्‍मन, बड़ी बहन तारा ने अपनी छोटी बहन से कहा कि रूक्‍मन आज एकादशी का व्रत है, हम लोगों ने आज भोजन नहीं खाना, तू बाजार जाकर फल ले आ, रूक्‍मन बाजार फल लेने के लिये गई, वहां उसने मछली के पकोड़े बनते देखे। उसने अपने पैसों के तो पकोड़े खा लिये तथा तारा के लिये फल लेकर वापस आ गई, फल उसने तारा को दे दिये, तारा ने पूछा कि तू अपने लिये फल क्‍यों नहीं लाई, तो रूक्‍मन ने बताया कि उसने मछली के पकोड़े खा लिये हैं।
उसी वक्‍त तारा ने शाप दिया, जा नीच, तूने एकादशी के दिन मांस खाया है, नीचों का कर्म किया है, जा मैं तुझे शाप देती हूं, तू नीचों की जून पाये। छिपकली बनकर सारी उम्र मांस ही ‘कीड़े-मकोड़े’ खाती रहे, उसी शहर में एक ऋषि गुरू गोरख अपने शिष्‍यों के साथ रहते थे, उनके शिष्‍यों में एक चेला तेज स्‍वभाव का तथा घमण्‍डी था, एक दिन वो घमण्‍डी शिष्‍य पानी का कमण्‍डल भरकर खुले स्‍थान में, एकान्‍त में, जाकर तपस्‍या पर बैठ गया, वो अपनी तपस्‍या में लीन था, उसी समय उधर से एक प्‍यासी कपिला गाय आ गई, उस ऋषि के पास पड़े कमण्‍डल में पानी पीने के लिए उसने मुंह डाला और सारा पानी पी गई, जब कपिता गाय ने मुंह बाहर निकाला तो खाली कमण्‍डल की आवाज सुनकर उस ऋषि की समाधि टूटी। उसने देखा कि गाय ने सारा पानी पी लिया था, ऋषि ने गुस्‍से में आ उस कपिला गाय को बहुत बुरी तरह चिमटे से मारा, वह गाय लहुलुहान हो गई, यह खबर गुरू गोरख को मिली, उन्‍होंने जब कपिला गाय की हालत देखी तो उस ऋषि को बहुत बुरा-भला कहा और उसी वक्‍त आश्रम से निकाल दिया, गुरू गोरख ने गाय माता पर किये गये पाप से छुटकारा पाने के लिए कुछ समय बाद एक यज्ञ रचाया, इस यज्ञ का पता उस शिष्‍य को भी चल गया, जिसने कपिला गाय को मारा था, उसने सोचा कि वह अपने अपमान का बदला जरूर लेगा, यज्ञ शुरू हो गया, उस चेले ने एक पक्षी का रूप धारण किया और चोंच में सर्प लेकर भण्‍डारे में फेंक दिया, जिसका किसी को पता न चला, एक छिपकली ‘जो पिछले जन्‍म में तारा देवी की छोटी बहन थी, तथा बहन के शाप को स्‍वीकार कर छिपकली बनी थी’ सर्प का भण्‍डारे में गिरना देख रही थी, उसे त्‍याग व परोपकार की शिक्षा अब तक याद थी, वह भण्‍डारा होने तक घर की दीवार पर चिपकी समय की प्रतीक्षा करती रही, कई लोगो के प्राण बचाने हेतु उसने अपने प्राण न्‍योछावर कर लेने का मन ही मन निश्‍चय किया, अब खीर भण्‍डारे में दी जाने वाली थी, बांटने वालों की आंखों के सामने वह छिपकली दीवार से कूदकर कढ़ाई में जा गिरी, नादान लोग छिपकली को बुरा-भला कहते हुये खीर की कढ़ाई को खाली करने लगे, उन्‍होंने उसमें मरे हुये सांप को देखा, तब सबको मालूम हुआ कि छिपकली ने अपने प्राण देकर उन सबके प्राणों की रखा की है, उपस्थित सभी सज्‍जनों और देवताओं ने उस छिपकली के लिए प्रार्थना की कि उसे सब योनियों में उत्‍तम मनुष्‍य जन्‍म प्राप्‍त हो तथा अन्‍त में वह मोक्ष को प्राप्‍त करे, तीसरे जन्‍म में वह छिपकली राजा स्‍पर्श के घर कन्‍या जन्‍मी, दूसरी बहन ‘तारा देवी’ ने फिर मनुष्‍य जन्‍म लेकर तारामती नाम से अयोध्‍या के प्रतापी राजा हरिश्‍चन्‍द्र के साथ विवाह किया।
राजा स्‍पर्श ने ज्‍योतिषियों से कन्‍या की कुण्‍डली बनवाई ज्‍योतिषियों ने राजा को बताया कि कन्‍या आपके लिये हानिकारक सिद्ध होगी, शकुन ठीक नहीं है, अत: आप इसे मरवा दीजिए, राजा बोले लड़की को मारने का पाप बहुत बड़ा है, मैं उस पाप का भार नहीं बन सकता।
तब ज्‍योतिषियों ने विचार करके राय दी, हे राजन । आप एक लकड़ी के सन्‍दूक में ऊपर से सोना-चांदी आदि जड़वा दें, फिर उस सन्‍दूक के भीतर लड़की को बन्‍द करके नदी में प्रवाहित कर दीजिए, सोने चांदी से जड़ा हुआ सन्‍दूक अवश्‍य ही कोई लालच से निकाल लेगा, और आपकी हत्‍या कन्‍या को भी पाल लेगा, आपको किसी प्रकार का पाप न लगेगा, ऐसा ही किया गया और नदी में बहता हुआ सन्‍दूक काशी के समीप एक भंगी को दिखाई दिया वह सन्‍दूक को नदी से बाहर निकाल लाया।
उसने जब सन्‍दूक खोला तो सोने-चांदी के अतिरिक्‍त अत्‍यन्‍त रूपवान कन्‍या दिखाई दी, उस भंगी के कोई संतान नहीं थी, उसने अपनी पत्‍नी को वह कन्‍या लाकर दी तो पत्‍नी की प्रसन्‍नता का ठिकाना न रहा, उसने अपनी संतान के समान ही बच्‍ची को छाती से लगा लिया, भगवती की कृपा से उसके स्‍तनो में दूध उतर आया, पति-पत्‍नी दोनो ने प्रेम से कन्‍या का नाम ‘रूक्‍को’ रख दिया, रूक्‍को बड़ी हुई उसका विवाह हुआ। रूक्‍को की सास महाराजा हरिश्‍चन्‍द्र के घर सफाई आदि का काम करने जाया करती थी, एक दिन वह बीमार पड़ गई, रूक्‍को महाराजा हरिश्‍चन्‍द्र के घर काम करने के लिये पहुंच गई, महाराज की पत्‍नी तारामती ने जब रूक्‍को को देखा तो वह अपने पूर्व जन्‍म के पुण्‍य से उसे पहचान गई, तारामती ने रूक्‍को से कहा – हे बहन, तुम मेरे यहां निकट आकर बैठो, महारानी की बात सुनकर रूक्‍को बोली- रानी जी, मैं नीच जाति की भंगिन हूं, भला मैं आपके पास कैसे बैठ सकती हूं ।
तब तारामती ने कहा – बहन, पूर्व जन्‍म में तुम मेरी सगी बहन थी, एकादशी का व्रत खंडित करने के कारण तुम्‍हें छिपकली की योनि में जाना पड़ा जो होना था सो हो चुका, अ‍ब तुम अपने इस जन्‍म को सुधारने का उपाय करो तथा भगवती वैष्‍णों माता की सेवा करके अपना जन्‍म सफल बनाओ, यह सुनकर रूक्‍को को बड़ी प्रसन्‍नता हुई और उसने उपाय पूछा, रानी ने बताया कि वैष्‍णों माता सब मनोरथों को पूरा करने वाली हैं, जो लोग श्रद्धापूर्वक माता का पूजन व जागरण करते हैं, उनकी सब मनोकाना पूर्ण होती है ।
रूक्‍को ने प्रसन्‍न होकर माता की मनौती करते हुये कहा – हे माता, यदि आपकी कृपा से मुझे एक पुत्र प्राप्‍त हो गया तो मैं भी आपका पूजन व जागरण करवाऊंगी । माता ने प्रार्थना को स्‍वीकार कर लिया, फलस्‍वरूप दसवें महीने उसके गर्भ से एक अत्‍यन्‍त सुन्‍दर बालक ने जन्‍म लिया, परन्‍तु दुर्भाग्‍यवश रूक्‍को को माता का पूजन-जागरण कराने का ध्‍यान न रहा। जब वह बालक पांच वर्ष का हुआ तो एक दिन उसे माता (चेचक) निकल आई । रूक्‍को दु:खी होकर अपने पूर्वजन्‍म की बहन तारामती के पास आई और बच्‍चे की बीमारी का सब वृतान्‍त कह सुनाया। तब तारामती ने कहा – तू जरा ध्‍यान करके देख कि तुझसे माता के पूजन में कोई भूल तो नहीं हुई । इस पर रूक्‍को को छह वर्ष पहले की बात याद आ गई। उसने अपराध स्‍वीकार कर लिया, उसने फिर मन में निश्‍चय किया कि बच्‍चे को आराम आने पर जागरण अवश्‍य करवायेगी ।
भगवती की कृपा से बच्‍चा दूसरे दिन ही ठीक हो गया। तब रूक्‍को ने देवी के मन्दिर में ही जाकर पंडित से कहा कि मुझे अपने घर माता का जागरण करना है, अत: आप मंगलवार को मेरे घर पधार कर कृतार्थ करें।
पंडित जी बोले – अरी रूक्‍को, तू यहीं पांच रूपये दे जा हम तेरे नाम से मन्दिर में ही जागरण करवा देंगे तू नीच जाति की स्‍त्री है, इसलिए हम तेरे घर में जाकर देवी का जागरण नहीं कर सकते। रूक्‍को ने कहा – हे पंडित जी, माता के दरबार में तो ऊंच- नीच का कोई विचार नहीं होता, वे तो सब भक्‍तों पर समान रूप से कृपा करती हैं। अत: आपको कोई एतराज नहीं होना चाहिए। इस पर पंडित ने आपस में विचार करके कहा कि यदि महारानी तुम्‍हारे जागरण में पधारें तब तो हम भी स्‍वीकार कर लेंगे।
यह सुनकर रूक्‍को महारानी के पास गई और सब वृतान्‍त कर सुनाया, तारामती ने जागरण में सम्मिलित होना सहर्ष स्‍वीकार कर लिया, जिस समय रूक्‍को पंडितो से यह कहने के लिये गई महारानी जी जागरण में आवेंगी, उस समय सेन नाई वहां था, उसने सब सुन लिया और महाराजा हरिश्‍चन्‍द्र को जाकर सूचना दी ।
राजा को सेन नाई की बात पर विश्‍वास नहीं हुआ, महारानी भंगियों के घर जागरण में नहीं जा सकती, फिर भी परीक्षा लेने के लिये उसने रात को अपनी उंगली पर थोड़ा सा चीरा लगा लिया जिससे नींद न आए ।
रानी तारामती ने जब देखा कि जागरण का समय हो रहा है, परन्‍तु महाराज को नींद नहीं आ रही तो उसने माता वैष्‍णों देवी से मन ही मन प्रार्थना की कि हे माता, आप किसी उपाय से राजा को सुला दें ताकि मैं जागरण में सम्मिलित हो सकूं ।
राजा को नींद आ गई, तारामती रोशनदान से रस्‍सा बांधकर महल से उतरीं और रूक्‍को के घर जा पहुंची। उस समय जल्‍दी के कारण रानी के हांथ से रेशमी रूमाल तथा पांव का एक कंगन रास्‍ते में ही गिर पड़ा, उधर थोड़ी देर बाद राजा हरिश्‍चन्‍द्र की नींद खुल गई। वह भी रानी का पता लगाने निकल पड़ा। उसने मार्ग में कंगन व रूमाल देखा, राजा ने दोनो चीजें रास्‍ते से उठाकर अपने पास रख लीं और जहां जागरण हो रहा था, वहां जा पहुंचा वह एक कोने में चुपचाप बैठकर दृश्‍य देखने लगा।
जब जागरण समाप्‍त हुआ तो सबने माता की अरदास की, उसके बाद प्रसाद बांटा गया, रानी तारामती को जब प्रसाद मिला तो उसने झोली में रख लिया।
यह देख लोगों ने पूछा आपने प्रसाद क्‍यों नहीं खाया ?
यदि आप न खाएंगी तो कोई भी प्रसाद नहीं खाएगा, रानी बोली- तुमने प्रसाद दिया, वह मैने महाराज के लिए रख लिया, अब मुझे मेरा प्रसाद दे दें, अबकी बार प्रसाद ले तारा ने खा लिया, इसके बाद सब भक्‍तों ने मां का प्रसाद खाया, इस प्रकार जागरण समाप्‍त करके, प्रसाद खाने के पश्‍चात् रानी तारामती महल की तरफ चलीं।
तब राजा ने आगे बढ़कर रास्‍ता रोक लिया, और कहा- तूने नीचों के घर का प्रसाद खा अपना धर्म भ्रष्‍ट कर लिया, अब मैं तुझे अपने घर कैसे रखूं ? तूने तो कुल की मर्यादा व प्रतिष्‍ठा का भी ध्‍यान नहीं रखा, जो प्रसाद तू अपनी झोली में मेरे लिये लाई है, उसे खिला मुझे भी तू अपवित्र करना चाहती है।
ऐसा कहते हुऐ जब राजा ने झोली की ओर देखा तो भगवती की कृपा से प्रसाद के स्‍थान पर उसमें चम्‍पा, गुलाब, गेंदे के फूल, कच्‍चे चावल और सुपारियां दिखाई दीं यह चमत्‍कार देख राजा आश्‍चर्यचकित रह गया, राजा हरिश्‍चन्‍द्र रानी तारा को साथ ले महल लौट आए, वहीं रानी ने ज्‍वाला मैया की शक्ति से बिना माचिस या चकमक पत्‍थर की सहायता के राजा को अग्नि प्रज्‍वलित करके दिखाई, जिसे देखकर राजा का आश्‍चर्य और बढ़ गया।
रानी बोली – प्रत्‍यक्ष दर्शन पाने के लिऐ बहुत बड़ा त्‍याग होना चाहिए, यदि आप अपने पुत्र रोहिताश्‍व की बलि दे सकें तो आपको दुर्गा देवी के प्रत्‍यक्ष दर्शन हो जाएंगे। राजा के मन में तो देवी के दर्शन की लगन हो गई थी, राजा ने पुत्र मोह त्‍याग‍कर रोहिताश्‍व का सिर देवी को अर्पण कर दिया, ऐसी सच्‍ची श्रद्धा एवं विश्‍वास देख दुर्गा माता, सिंह पर सवार हो उसी समय प्रकट को गईं और राजा हरिश्‍चन्‍द्र दर्शन करके कृतार्थ हो गए, मरा हुआ पुत्र भी जीवित हो गया।
चमत्‍कार देख राजा हरिश्‍चन्‍द्र गदगद हो गये, उन्‍होंने विधिपूर्वक माता का पूजन करके अपराधों की क्षमा मांगी।
इसके बाद सुखी रहने का आशीर्वाद दे माता अन्‍तर्ध्‍यान हो गईं। राजा ने तारा रानी की भक्ति की प्रशंसा करते हुऐ कहा हे – तारा तुम्‍हारे आचरण से अति प्रसन्‍न हूं। मेरे धन्‍य भाग, जो तुम मुझे पत्‍नी रूप में प्राप्‍त हुई।
आयुपर्यन्‍त सुख भोगने के पश्‍चात् राजा हरिश्‍चन्‍द्र, रानी तारा एवं रूक्‍मन भंगिन तीनों ही मनुष्‍य योनि से छूटकर देवलोक को प्राप्‍त हुये।
माता के जागरण में तारा रानी की कथा को जो मनुष्‍य भक्तिपूर्वक पढ़ता या सुनता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, सुख-समृद्धि बढ़ती है, शत्रुओं का नाश होता है।
इस कथा के बिना माता का जागरण पूरा नहीं माना जाता है।
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Sunday, October 10, 2021

शनि 11 अक्टूबर से बदलेंगे चाल, 9 राशियों की चमकेगी किस्मत, जानें किसे होगा नुकसान

 ज्योतिष शास्त्र में अत्यधिक चर्चित हैं। शनि वर्ष में कम से कम एक बार तो अपनी चाल बदलते ही हैं। कभी वक्री तो कभी मार्गी हो जाते हैं। जब भी शनि अपनी चाल बदलते हैं इनकी चाल से कईयों का जीवन बदल जाता है। 11 oct 2021 शनि एक बार फिर से मार्गी हो गए हैं। 

मार्गी शनि व्यापार-नौकरी के लिए अच्छा माना जाता है। इसे शनि की अच्छी स्थिति कहा जाता है जिससे पद, प्रतिष्ठा और पैसों की आमद होती है। मार्गी शनि कुछ राशियों के लिए खासकर राजनीति से जुड़े जातकों के लिए बहुत अच्छा रहेगा। परंतु शनि के बदलने से कुछ राशि वाले परेशान भी हो सकते हैं।

मेष :  राशि के जातकों के लिए पिछले कुछ समय से चली आ रही परेशानी दूर होगी। धन संबंधित कार्यों और विवादों में सफलता मिलेगी। रुका हुआ पैसा मिलने के योग बन रहे हैं। योजना बनाने की बजाय प्रत्यक्ष कार्यों की तरफ ध्यान दें।  पैतृक कार्यों में सफलता मिलने के योग बन रहे हैं। मेष राशि वाले लोगों के लिए समय अच्छा है। वैचारिक उतार-चढ़ाव होने के कारण कार्यक्षेत्र में थोड़ी परेशानी वाला समय भी रहेगा। निर्णय लेने में परेशानी होगी ।

वृष – विद्या, बुद्धि के क्षेत्र में सफलता मिलेगी। स्वभाव में बदलाव होगा। रुके हुए काम समय से पूरे होंगे। आत्मबल बढ़ा हुआ होगा। सोचे हुए काम समय पर पूरे हो जाएंगे। मौसमी बीमारियों से परेशान हो सकते हैं।  स्वास्थ्य कमजोर हो सकता है। कामकाज में मन लगेगा। बिजनेस करने वाले लोगों के कामों में देरी हो सकती है। सावधान रहें, बड़े सौदे भी टल सकते हैं


मिथुन – वैवाहिक जीवन के लिए शनि का मार्गी होना आपके लिए शुभ है। पुराने मतभेद सुलझ जाएंगे। विचारों में सकारात्मकता होने से बड़े काम भी पूरे हो जाएंगे। उन कामों का असर भी लंबे समय तक रहेगा। इस राशि के विद्यार्थियों के लिए समय अच्छा है।  छोटी-छोटी यात्राओं से फायदा होगा। इस राशि के अविवाहित लोगों को विवाह के प्रस्ताव मिलेंगे। 

कर्क- मिथुन राशि वाले लोगों के लिए समय अच्छा हैं। मान-सम्मान मिलेगा। पद और प्रतिष्ठा भी मिलेगी। दुश्मनों पर जीत मिलेगी। ऋण संबंधी कामों में सफलता मिलेगी। आर्थिक स्थिति के नजरिए से मिथुन राशि वाले लोगों का समय अच्छा है।  
धार्मिक कामों में मन लगेगा। अचानक यात्राओं का योग भी बन रहा है। दूर स्थानों के लोगों से महत्वपूर्ण समाचार मिल सकते हैं। आर्थिक लाभ मिलेगा।

सिंह- सकारात्मक विचारों के साथ आगे बढ़ें। सफलता मिलेगी। इस राशि के विद्यार्थियों के लिए समय शुभ है। सफलता मिलेगी। महत्वपूर्ण लोगों से मुलाकात हो सकती है। मीन राशि की स्त्रियों को अचानक सफलता मिल सकती है।संतान से जुड़ी चिंता परेशान कर सकती है। सोचे हुए काम समय से पूरे होंगे। किसी महत्वपूर्ण यात्रा में सफलता मिलेगी। कार्यस्थल पर महत्वपूर्ण घटनाक्रम बनेंगे, जो आपको सफलता दे सकते हैं।

कन्या – दुश्मन हावी रहेंगे। सेहत से जुड़ी परेशानियां होंगी। जीवनसाथी से वैचारिक विरोध हो सकता है। राजनीति से जुड़े लोग सफल होंगे। वाद-विवाद और धन से जुड़े मामलों में अचानक सफलता मिल सकती है। धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेने का योग बन रहा है। कानूनी मामले पेचीदा हो सकते हैं। कामकाज में महत्वपूर्ण पद मिल सकता है


तुला – आय में स्थिरता होगी। माता और संतान से सहयोग मिलेगा। बड़े और महत्वपूर्ण लोगों से मुलाकात हो सकती है। पुराने संपर्कों से फायदा मिलेगा। कार्यक्षेत्र में समय प्रतिकूल रहेगा।  इस राशि के अविवाहित लोगों को विवाह के प्रस्ताव मिल सकते हैं। पढ़ाई में मन नहीं लगेगा। स्त्री पक्ष से सहयोग और कार्य सिद्धि होगी। जीवनसाथी के साथ समय बीतेगा

वृश्चिक – जलीय स्थानों पर जाने का मौका मिलेगा। आत्मविश्वास बढ़ा हुआ रहेगा। कारोबार से जुड़ी यात्राएं फायदेमंद रहेगी। नए कामों के लिए समय ठीक नहीं है। किसी भी तरह का नया निवेश न करें। अतिरिक्त प्रयासों से सफलता मिलेगी। आमदनी में कुछ कमी हो सकती है। गोपनीय योजनाएं सार्वजनिक होने से नुकसान हो सकता है। पैसा उधार देने से बचें

धनु- सेहत खराब हो सकती है। विरोधी प्रभावहीन रहेंगे। व्यस्तता के चलते काम में रुकावटें आ सकती है। पिता की सेहत से तनाव हो सकता है। जिसका सहयोग किया है वह व्यक्ति कष्ट दे सकता है।खुद पर भरोसा रखें। वैवाहिक जीवन में कुछ विवाद हो सकते हैं, जिससे तनाव भी हो सकता है। दूर स्थानों से कोई अच्छी खबर मिल सकती है। यात्राओं के दौरान महत्वपूर्ण व्यक्तियों से मुलाकात होने के योग बन रहे हैं

मकर – जीवनसाथी से सुख मिलेगा। क्षमता अनुसार शिक्षण के क्षेत्र में भी सफलता मिलेगी। नए वस्त्राभूषण के योग बन रहे हैं। धार्मिक यात्राओं का योग हैं। कार्यस्थल पर व्यस्तता रहेगी। परिवार को समय नहीं दे पाएंगे। आसपास के लोगों से फायदा होगा। धन संबंधी काम पूरे होंगे। रुका हुआ पैसा मिलेगा।

कुंभ- पैतृक धन में वृद्धि होने के योग बन रहे हैं। परंपरागत कामों में लाभ मिलेगा। नए लोगों से मिलेंगे और उनसे अच्छे संबंभी बनेंगे। वाणी के प्रयोग से कामों में सफलता मिलेगी और धन वृद्धि होगी। सोचे हुए कामों में सफलता मिलेगी। नए निवेश करने के लिए समय अच्छा है, फायदा मिलेगा। खान-पान में सावधानी रखें। पेट से जुड़ी बीमारियां हो सकती है। संतान से जुड़ा तनाव दूर होगा। पराक्रम और मेहनत से सफलता मिलेगी।

मीन -राशि के जातकों के लिए यह परिवर्तन फायदेमंद होगा। विवादों में विजय मिलेगी। बिना विचारे निवेश न करें। संतान सुख मिलेगा। विरोधी आपको परेशान करने की कोशिश कर सकते हैं। दाम्पत्य जीवन में परेशानी हो सकती है। सप्ताह के अंत में धन लाभ होगा। स्वास्थ्य खराब हो सकता है।

Friday, September 17, 2021

Homosexuality के कुछ योग in Astrology

 ज्योतिष शास्त्र के अनुसार Homosexuality के कुछ योग

According to the human sexual quality is define 3 types

1.विपरीत लिंग के लोगो के साथ (विषमलैंगिक )
2.समान लिंग के लोगो के साथ (समलैंगिक ) 3.लिंग लिंग के लोगो के साथ (उभयलिंगी )

1. जब भी कुंडली में शुक्र छठे घर में होगा और उस पर शनि की दृष्टि होगी और बुध का साथ होगा तब एस देखा गया है ऐसा व्यक्ति अपोजिट सेक्स से थोड़ा घबराता है ।
2. शुक्र  आठवें घर में हो सूर्य के सबसे समीप हो या कह सकते हैं कि सूर्य से पूर्ण अस्त हो और शनि की दृष्टि हो तब भी ऐसा व्यक्ति  अपोजिट सेक्स से घबराता है।
3. देखा यह भी गया है की आठवें घर में शुक्र और सूर्य साथ हो तो ऐसे व्यक्ति को वीर्य की प्रॉब्लम होती है।
4. सातवें घर में शनि और बुध का साथ होना ऐसे व्यक्ति भी अपॉजिट सेक्स से घबराते हैं।
5.  कुंडली में शुक्र कहीं भी हो और शनि से दृष्ट हो और डिग्री में कम हो तो भी ऐसा व्यक्ति देखा गया है कि अपॉजिट सेक्सी घबराता है।
6.ज्योतिष शास्त्र में पंचम भाव प्रकृति और संबंध है

आइए अब हम कुंडली को देखते हैं क्या यह व्यक्ति गे कैसे हुआ यह कुंडली तुला लग्न की है और इस व्यक्ति की मकर राशि है उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के चौथे चरण में व्यक्तिगत जन्म हुआ है अगर देखा जाए तो चार ग्रह व्यक्ति के लग्न में ही है शुक्र, शनि ,बृहस्पति और सूर्य अगर कुंडली में ध्यान से देखा जाए तो शुक्र तुला राशि में ही है जो कि उसकी स्वयं की राशि है लेकिन व्यक्ति को अपोजिट सेक्स से फिर भी डर लगता है इसका कारण है शुक्र का पूरी तरह से अस्त है और शनि भी लग्न में शुक्र के साथ बैठे हैं और अगर डिग्री वाइस देखा जाए तो बुध भी शुक्र के समीप है जिससे कि व्यक्ति के अंदर गे की प्रवृत्ति जागृत हुई यह जन्म से गे नहीं था लेकिन दशा अपना खेल हमेशा दिखाती है ।
इस कुंडली में भी बृहस्पति और शुक्र साथ में भी हैं ऐसा बहुत सी कुंडलियों में देखा गया है कि जब बृहस्पति और शुक्र साथ होते हैं तो व्यक्ति का मन दो जगह भटकता है एक तरफ व्यक्ति यौन सुख की तरफ भागता है और दूसरी तरफ जल्दी उससे निकलना चाहता है कह सकते हैं के मन में तो उतावलापन रहता है पर जब भी बिस्तर पर जाता है वह बेकार हो जाता है। 
कृपया कमेंट करके जरूर बताएं कि मेरा यह ब्लॉग आप को कैसा लगा और आपका प्यार मुझे मिला आपने मुझे इस काबिल समझा कि मैं नए नए ब्लॉग ला सकूं मेरे पुराने ब्लॉकों पर आपने बहुत प्यार दिया और मुझसे व्हाट्सएप पर जुड़े अपने प्रश्न पूछे और समस्याओं का हल जाना मैं आपका दिल से धन्यवाद करता हूं आपका आचार्य विपिन तिवारी
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Monday, September 13, 2021

Some Vastu tips for health life

1. घर की उत्तर पूर्व दिशा घर की बहुत महत्वपूर्ण दिशा होती है।यदि शौचालय है, तो परिवार के 60 वर्ष से अधिक उम्र के सदस्यों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और अगली पीढ़ी के साथ समस्याओं का सामना करना 
पड़ेगा।

2. उत्तर पूर्व में रसोई घर में रहने से कैंसर हो सकता है अगर घर में 15 साल से अधिक समय तक 
रहता है ।

3. पूर्वोत्तर में इस्त्री न करें, विशेष रूप से घर की महिलाओं के बीच भय के संबंध में बहुत सारे मुद्दे 
होंगे।

4. अगर उत्तर-पूर्व में कोई पुराना कुआं है, तो उसे बंद कर दें या अपना घर शिफ्ट कर दें।

5. सीढ़ी, विशेष रूप से दक्षिणावर्त भी भय देगा, क्योंकि
 दिमाग अवरुद्ध हो जाएगा और स्पष्टता के साथ निर्णय नहीं ले पाएगा और जिसके कारण निर्णय लेने में देरी होगी, अवसर चूक जाएंगे।Vastu

6. उत्तर पूर्व में कटौती से निर्णय लेने की प्रक्रिया में बाधा आएगी। घर के निवासी चीजों को सही नजरिए से नहीं देख पाएंगे। महिला सदस्यों को ब्रेस्ट कैंसर हो 
सकता है। पुरुष सदस्य पक्षाघात से पीड़ित हो सकते हैं।

7. पूर्वोत्तर में शौचालयों के कारण असाध्य रोग हो सकते हैं। दूसरी और तीसरी बार कैंसर का दोबारा होना। पक्षाघात और मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे। 
शादियां टूट सकती हैं।

8. पूर्वोत्तर में दरारें और कार पार्किंग, खासकर अगर लाल कार या मैरून कार से कैंसर, दीर्घकालिक बीमारी, अल्जाइमर हो सकता है।

9. ईशान कोण में स्टोर रूम न बनाएं। यह निर्णय लेने की प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करेगा। विवाह के लिए गलत साथी का चयन हो सकता है।Vastu tips लड़कियां और लड़के सही उम्र में सही चुनाव करने और सिंगल रहने में सक्षम नहीं हो सकते हैं।
#Vastu
#Tips 

Thursday, September 2, 2021

यौन दुर्बलता sex astrology#2022

 #यौन दुर्बलता
नमस्कार दोस्तों मैं आपका मित्र आचार्य विपिन तिवारी आज आपके सामने लाया हूं नया टॉपिक जिसका नाम है यौन दुर्बलता या उसे आप नपुंसकता भी कह सकते हैं जाने के लिए हम आज ज्योतिष में ऐसे कौन से योग होते हैं या कुंडली में ऐसे कौन से ग्रह बैठे हैं जिससे कि यह समस्या व्यक्ति के सामने आती है !
और देखा गया है कि इस समस्या से घरों में क्लेश और झगड़े होते हैं और यहां तक भी देखा गया है कि किसी और से संबंध भी स्थापित हो जाते हैं जिस कारण से डिवोर्स तक की नौबत आ जाती है अगर समय रहते हुए इनका उपाय कर लें तो यह समस्या दूर हो सकती है और क्लेश से बचा जा सकता है आइए जानते हैं !

यौन दुर्बलता के योग (#sex life) 
1. जब कुंडली में शनि व शुक्र इकट्ठे दशम भाव में हूं तो भी यह परेशानी देखी गई है ।
2. शुक्र से छठे या 12वीं स्थान में शनि का होना ।
3. विषम राशियों में स्थित सूर्य व चंद्रमा में परस्पर दृष्टि हो।
4.  विषम राशि से बुध और शनि में परस्पर दृष्टि हो
5.  सम राशियों में सूर्य व मंगल में परस्पर दृष्टि हो
6.  लग्न तथा चंद्र विषम राशियों में हूं तथा दोनों सम राशि  में स्थित मंगल से दृष्ट हो।
7. चंद्र विषम राशि में तथा बुध सम राशि में हो तथा दोनों मंगल से दृष्ट हो ।
8. लग्न चंद्र तथा शुक्र सभी पुरुष विषम राशि में हूं।

कुछ योग ऐसे भी होते हैं जिसमें व्यक्ति अपने साथी को पूर्ण रूप से संतुष्ट नहीं कर पाता आइए जानते हैं।
1. शुक्र किसी वक्री ग्रह की राशि में हो।
2. लग्नेश लग्न में तथा शुक्र सप्तम में हो।
3. चंद्र शनि की युति मंगल से सोते या दसवें भाव में हो।


मैं अगले टॉपिक में इसके कुछ उपाय भी बताऊं कृपया मेरे पेज को लाइक करें और फॉलो करें और किसी प्रकार की अब कोई कुंडली से जानकारी चाहिए तो वह मुझे संपर्क कर सकते हैं 9015 84 85 32

Friday, August 20, 2021

राशि अनुसार जानेभाई को राखी बांधना और शुभ मुहूर्त और मंत्र

*राशि अनुसार भाई को राखी  बांधना और मिठाई शुभ मंगल लाभ रक्षा शुभ महूरत कथा पूजा विधि मंत्र .....*

*राखी बांधने का मुहूर्त-:*
रक्षाबंधन पर प्रात: 06 बजकर 15 मिनट से प्रात: 10 बजकर 34 मिनट  तक शोभन योग रहेगा, धनिष्ठा नक्षत्र शाम को करीब 07 बजकर 39 मिनट तक रहेगा. 22 अगस्त 2021 को दोपहर 01 बजकर 42 मिनट दोपहर से शाम 04 बजकर 18 मिनट तक, राखी बांधना सबसे शुभ रहेगा. 
• रक्षाबंधन तिथि- रविवार 22 अगस्त 2021 
• पूर्णिमा तिथि -21 अगस्त शाम 3.45 बजे से शुरू,शाम 5.58 बजे समापन.
• शुभ मुहूर्त : सुबह 5.50 बजे से शाम 6.03 बजे तक.राखी
• राखी के लिए दोपहर का समय-1.44 बजे से 04.3 बजे तक .
• अभिजीत मुहूर्त-दोपहर 12.04 बजे से 12.58 बजे तक.

*आपके भाई की राशि रक्षासुत्र और लाभ*
  
मेष :  आपके भाई  की राशि मेष है उसे लाल रँग  की राखी बांधें और मिठाई में मालपुए खिलाएं. ऐसा करने से भाई को मानसिक शांति मिलेगी 
 
वृषभ : इस राशि के भाई को सफेद रेशमी डोरी वाली राखी बांधें और रसमलाई  मिठाई ही खिलाएं, ऐसा करने से नौकरी व्यापार में लाभ मिलेगा और उर्जा से ओतप्रोत 
 
मिथुन : आपके भाई  की राशि मिथुन है, बहने उन्हें हरे रँग  वाली राखी बांधें और हरी बर्फी या गुलाबजामुन मिठाई खिलाएं. ऐसे करने से सामाजिक कार्यों में रुचि बनी रहेगी.विचार शक्ति बढ़ेगी 
 
कर्क : आपके भाई की राशि कर्क है तो इस साल राखी के त्योहार पर अपने भाई की कलाई पर सफ़ेद रेशम वाली राखी बांधें. मिठाई में कलाकंद या बादाम कतली  खिलाएं. ऐसे करने से मान-सम्मान में बढ़ोतरी होगी भावनात्मक रिश्ते मजबूत होंगे

सिंह : सिंह राशि वाले भाइयों को ऑरेंज राखी बांधें और मिठाई में घेवर  मिठाई या बलुशाई खिलाएं. इससे शिक्षा के क्षेत्र में सफतला प्राप्त होगी और कार्रिएर जॉब लाभ 

कन्या : अगर आपके भाई की राशि कन्या है तो अपने भाईयों को गणेशजी के प्रतीक वाली राखी बांधें और मोतीचूर के लड्डू खिलाएं. इससे वैवाहिक जीवन सुखद रहेगा और अच्छा शुभ परिणाम मिलेगा 

तुला : आपके  भाई की राशि तुला है वो रेशमी हल्के गुलाबी  डोरे वाली राखी बांधें, मिठाई में उन्हें कजुकतली या मावा बर्फी मिठाई खिलाएं. ऐसे करने से व्यवसाय की चिंता दूर होगी और स्थिति सामान्य बनी रहेगी कार्य शक्ति बढ़ेगी  

वृश्चिक ; आपके भाई की राशि वृश्चिक हे आप चमकीला लाल रँग  वाली राखी बांधें, मिठाई में उन्हें पंचमेवा बर्फी या अंजीर कतली मिठाई खिलाएं. ऐसे करने से उनके क्रोध व रोगी से आराम मिलगे 

धनु : भाई की राशि धनु  है वो पीले  रक्षासूत्र वाली राखी बांधें, मिठाई में उन्हें बेसन चक्की या जलेबी  मिठाई खिलाएं. ऐसे करने से नौकरी व्यापार की बाधा दूर होगी 

मकर : आपके  भाई की राशि मकर  है वो परपल रक्षासुत्र   वाली राखी बांधें, मिठाई में उन्हें काला गुलाबजामुन मिठाई खिलाएं. ऐसे करने से जीवन की सभी बाधा दूर होगी 

कुम्भ : भाई की राशि कुम्भ  है वो नीले धागे वाली राखी बांधें, मिठाई में उन्हें सोहन हलवा या सोहन पपड़ी मिठाई खिलाएं. ऐसे करने सेउनको धन सम्पति लाभ होगा 

मीन : भाई की राशि मीन  है वो पीले रक्षासुत्र वाली राखी बांधें, मिठाई में उन्हें केसर बाटी मिठाई खिलाएं. ऐसे करने से  मन स्वच्छ होगा 

*रक्षाबंधन की कथा-:*
हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बाद देवताओं और असुरों के बीच में युद्ध हुआ था। जो 12 वर्षों तक चला था। जिसके अंत में दानव जीत गए थे। दानवों ने इसके बाद देवताओं के राजा-इंद्र के सिंहासन पर कब्जा कर लिया, बल्कि तीनों लोकों पर कब्जा कर लिया। जब इंद्र युद्ध हार गए तब सभी देवता गुरु बृहस्पति जी के पास गए और उनसे इस समस्या का निदान करने को कहा।बृहस्पति ने इंद्र को कुछ मंत्रों का जाप करने की सलाह दी। जिससे उन्हें सुरक्षा प्रदान हो सके। देवगुरु बृहस्पति ने श्रावण मास के दिन मंत्रों का उच्चारण शुरु किया।

*रक्षाबंधन के मंत्र*
 येन बद्धो बलिराजा, दानवेन्द्रो महाबलः तेनत्वाम प्रति बद्धनामि रक्षे, माचल-माचलः

*पूजा विधि:* राखी बांधने से पहले भाई को उत्तर या पूर्व दिशा की तरफ मुख करके बिठा लें। फिर भाई के माथे पर तिलक लगाएं और उन्हें रक्षा सूत्र बांधें। भाई की आरती उतारें। मुंह मीठा करें। अगर भाई बड़ा है तो आप उसके चरण स्पर्श करें। राखी बंधवाने के बाध भाई अपनी इच्छानुसार बहनों को भेंट देते हैं।

ज्योतिषाचार्य विपिन तिवारी
Whatsapp number :9015848532

Tuesday, August 17, 2021

अवैध संबंध के बारे में कुंडली से

जन्म कुंडली में ऐसे योग के बारे में वैवाहिक जीवन के बाद भी किसी अन्य स्त्री या पुरुष से संबंध

--जन्म कुंडली में शनि और शुक्र की युति, वैवाहिक जीवन में किसी अन्य का आना बताता है।

--  पंचम भाव में शनि, शुक्र और मंगल की युति अवैध संबंध का निर्माण करती है।

--  मेष या वृश्चिक राशि में मंगल के साथ शुक्र के होने से पराई स्त्री से घनिष्ठा बनती है।

--  जन्म कुंडली में चन्द्रमा से द्वितीय स्थान में शुक्र हो तो 'सुनफा योग' बनता है । ऐसा जातक भौतिक सुखों की प्राप्ति करता हैं उसका सौन्दर्य आकर्षक होता है अन्य स्त्रियों से शारीरिक संबंध की प्रबल संभवना होती है।

--  द्वितीय, छठे और सप्तम भाव के किसी भी स्वामी के साथ शुक्र की युति लग्न में होने से जातक का चरित्र संदेहप्रस्त होता है।

--  सूर्य और शुक्र की युति मीन लग्न में होने से जातक को अत्यंत कामुक बनाती है उसका अवैध संबंध बनता है तथा ऐसे जातक की  कामवासना की तृप्ति शीघ्र नहीं होती।

--  बुध और शुक्र की युति यदि सप्तम भाव में हो तो जातक अवैध संबंधों के लिए नूतन तरीके अपनाता हैं।

--  शनि, मंगल और शुक्र का काम वासना से घनिष्ठ संबंध है यदि जन्म कुंडली में शनि और मंगल की युति सप्तम भाव पर हो तो जातक समलिंगी होता है। ये ही युति यदि अष्टम, नवम, द्वादश भाव पर हो तो जातक का अपने बड़ों से अवैध संबंध होता हैं।

-- मंगल और राहू की युति अथवा दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक कामुक होता है एवं अवैध संबंध बनाने के लिए उसका मन भटकता है।

-- लग्न, चतुर्थ, सप्तम, दशम भाव में गुरु पर मंगल शुक्र का प्रभाव और चन्द्रमा पर राहू का प्रभाव हो तो व्यक्ति अवैध संबंध बनाने के लिए सभी सीमाओं का उल्लंघन कर देता है।

--  लग्न में शनि का होना जातक को कामवासना अधिक देता है, पंचम भाव में शनि होने से अपने से बड़ी स्त्रियों के प्रति अवैध संबंध बनाने के लिए जातक को आकर्षित करता है।

--  शनि का सप्तम भाव में चन्द्रमा के साथ होना और मंगल की दृष्टि पड़ने से जातक वेश्यागामी होता है इसी योग में अगर शुक्र का संबंध दृष्टि अथवा युति से बन जाए तो अवैध संबंध निश्चित हो जाता है।

--  चन्द्रमा जन्म कुंडली में कहीं पर भी नीच को होकर बैठा हो और उस पर पाप प्रभाव हो तो जातक अपने नौकर/नौकरानी से अवैध संबंध बनवाता है यहीं चन्द्रमा अगर दूषित होकर नवम भाव में स्थित हो तो जातक अपने गुरु अथवा अपने से बड़ों के साथ अवैध संबंध बनाता है।

--  मंगल उत्तेजना को दर्शता है जन्म कुंडली में किसी पाप ग्रह के साथ मंगल की युति सप्तम भाव में हो या सूर्य सप्तम में और मंगल चतुर्थ स्थान में हो अथवा चतुर्थ भाव में राहू हो तो व्यक्ति कामुकता में अंध होकर पशु समान कार्य करता है।

--  राहू का अष्टम भाव में होना  और शुक्र का भी साथ होना जातक का अवैध संबंध कराता है।

-- तुला राशि में चार ग्रह एक साथ होने से जातक के परिवार में कलेश उत्पन्न करते है जिसके कारण जातक बाहर अवैध संबंध बनाता है।

-- शनि का दशम भाव में होना जातक के मन में विरोधाभास उत्पन्न करता है। शुक्र और मंगल की युति जन्म कुंडली में कहीं पर भी हो एवं शनि दशम भाव में हो तो जातक ज्ञानवान भी होता है एवं काम वासना और अवैध संबंधों को गंभीरता से लेता है उसका मन स्थिर नहीं रह पाता, कभी ज्ञानी बन जाता है कभी अवैध संबंधों का दास।

-- बुध और शनि का संबंध सप्तम भाव से हो तो ऐसे जातक यौनक्रियाओं में नीरस एवं अयोग्य होते हैं।

--  सूर्य का सप्तम भाव में होना जातक के वैवाहिक जीवन में कलेश उत्पन्न करता है, इससे परेशान होकर जातक अवैध संबंध बनाता है।

-- सप्तम भाव में राहू और शुक्र हो अथवा राहू और चन्द्रमा की युति हो तथा गुरु द्वादश भाव में स्थित हो तो विवाह पश्चात कार्यालयों में ही अवैध-संबंध बनते हैं। 

--  बुध और शनि की युति यदि द्वादश भाव में हो तो जातक शीघ्रपतन का रोगी बन जाता है और इसी योग में यदि लग्न, सप्तम और अष्टम भाव में राहू हो तो व्यक्ति अपनी जवानी को स्वयं नष्ट करता है एवं उसका जीवनसाथी किसी अन्य से शरीरिक तृप्ति लेता है।

ज्योतिषाचार्य विपिन तिवारी
Whatsapp number :9015848532

Thursday, August 12, 2021

मकर राशि एक depressing राशि है चिढ़चिडाहट से भरी हुई एक सुस्त राशि

मकर राशि एक depressing राशि है  चिढ़चिडाहट से भरी हुई एक सुस्त राशि

इसके ठीक सामने कर्क राशि है जो की  सफलता के शीर्षबिन्दु को दर्शाती है 
मकर राशि अपमान की चट्टान की तरह  , जख्म ,विफलता , नफरत ,उपहास, निंदा  और set backs की राशि है 
मकर राशि में जितने ज्यादा ग्रह होंगे ये उतना ही दुःखदाई साबित होगी 

मकर लग्न या फिर मकर चन्द्र  राशि के लोग  जीवन में अक्सर दुःख का झुनझुना लेकर घूमते है 

इंदिरा गांधी जी की कर्क लगन की कुंडली मे चन्द्रमा मकर राशि में था 

उनके खुद के security guards ने उनकी हत्या कर दी 

उससे पहले उन्होंने अपने पुत्र संजय की मृत्यु का दुःख झेला 

मकर लग्न हो और उसका स्वामी शनि राहू के साथ हो तो  व्यक्ति जीवन में अक्षम (disable ) होकर रह जाता है

ये एक कार्मिक राशि है क्यों की काल पुरुष की कुंडली के 10वे भाव की राशि है

यहाँ पर ब्रहस्पति जो की धन और भाग्य भाव का कारक है वो नीच हो जाता है

शश महापुरुश व धन योग बनाने के बाद भी यह राशि negative तो है ही

मैंने किसी ज्ञानी जन से सुना है की मकर राशि में बैठा एक विशेष ग्रह जीवन साथी के गहने तक बिकवा देता है

मकर लग्न यदि पाप कर्तरि में हो 
अर्थात शनि 12वे भाव मे हो और राहू कुंडली के दूसरे भाव मे हो तो ऐसा व्यक्ति जेल भी चला जाता है

1989 और 1988 वर्ष में पैदा हुए मकर लग्न के लोगो की कुंडली मे ये योग बनता है

 मकर राशि में शनि हो और कर्क राशि में सूर्य हो तो ऐसा जातक ढीठ, उक्साने वाला व बेशर्म होता है
व piles के रोग से ग्रसित रहता है

व उसे गठिया बाय के रोग भी होते हैं 

18 जुलाई से 17 अगस्त 2021 तक आकाश में ऐसा योग बना भी हुआ है

मकर राशि का स्वामी शनि पीड़ित हुआ तो जहां मकर राशि पड़ती है वहाँ से जुड़े दुःख बड़ा देगा

मारा मंजल की छाल  16 तरह की मधुमेह की बीमारिया दूर करने में सक्षम होती है और गुदा रोग दूर करने में भी लाभ कारी है

Piles की समस्या से जूझ रहे लोगों को nature call  में देर नहीं करनी चाहिए ना ही किसी सख्त जगह पर लंबे समय तक बैठे रहना चाहिए और ना ही ऐसा food  खाना चाहिए जिससे पेट के रोग बड़े

Saturday, August 7, 2021

सावन की हरियाली अमावस्‍या का महत्‍व

सावन की हरियाली अमावस्‍या का महत्‍व
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अमावस्या में श्रावण मास की अमावस्या का अपना अलग ही महत्व है। इसे हरियाली अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। हरियाली अमावस्या का त्योहार सावन महीने की अमावस्या को मनाया जाता है। यह त्योहर सावन में प्रकृति पर आई बहार की खुशी में मनाया जाता है। हरियाली अमावस पर पीपल के वृक्ष की पूजा एवं फेरे किये जाते है तथा मालपूए का भोग बनाकर चढाये जाने की परम्परा है। हरियाली अमावस्या पर वृक्षारोपण का भी महत्व है। 

इस वर्ष 08 अगस्त के दिन हरियाली अमावस्या मनाई जाएगी अमावस्या के साथी ही यह पितृकार्येषु (पित्रो के लिए किए जाने वाले जप दान आदि) की अमावस्या के रुप में भी जानी जाती है. कालसर्प योग, ढैय्या तथा साढ़ेसाती सहित शनि संबंधी अनेक बाधाओं से मुक्ति पाने का यह दुर्लभ समय होता है।

एक 8 अगस्त रविवार को पुष्य नक्षत्र, कर्क राशि के चंद्रमा के साथ हरियाली अमावस्या का संयोग दुर्लभ ही होता है। अमृत सिद्धि व सर्वार्थ सिद्धि योग में हरियाली अमावस्या हो, गुरुवार को पुष्य नक्षत्र हो तो यह अमृत व सर्वार्थ सिद्धि योग कहलाता है। नक्षत्र गणना के अनुसार पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रों का राजा कहा जाता है। शास्त्रीय गणना अनुसार अमावस्या तिथि के स्वामी पितृ देव हैं तथा चंद्रमा स्वयं की राशि कर्क में रहेंगे। यह दोनों पितृ कर्म का विशेष लाभ देने वाले माने जाते हैं। इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान, श्राद्धकर्म करने से अतिशुभ फल मिलने की शास्त्रीय मान्यता है। 

हरियाली अमावस्या के कर्म
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हरियाली अमावस्या के दिन किसी पवित्र नदी में स्नान करके, उसके किनारे बैठकर किसी पंडित से पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान, श्राद्धकर्म करवाया जाए तो पितरों को शांति मिलती है। यह कर्म करने के बाद पितरों के नाम से गरीबों को भोजन करवाएं, गाय को चारा खिलाएं, गरीबों को वस्त्र आदि भेंट करना चाहिए।

अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ की पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन दोपहर 12 बजे के पूर्व पीपल के पेड़ के पेड़ की 21 परिक्रमा करते हुए जल अर्पित करें। पीपल के पेड़ का पूजन कर मौली के 21 फेरे बांधें। शाम को सूर्यास्त से पूर्व पीपल के पेड़ के नीचे आटे से पांच दीपक बनाकर प्रज्जवलित करें। इससे धन संबंधी समस्या समाप्त होती है। ध्यान रहे यह प्रक्रिया सूर्यास्त के बाद बिलकुल न करें।

अमावस्या के दिन दृष्टिहीन, अपंग, मंदबुद्धि, लंगड़े या जिनका कोई अंग भंग हो गया हो, ऐसे लोगों को वस्त्र भोजन भेंट करें। इससे जीवन में आने वाले संकटों से रक्षा होती है।

हरियाली अमावस्या की रात्रि में दीपदान का बड़ा महत्व है। इस दिन रात्रि में किसी नदी, तालाब में दीपदान करना चाहिए। इससे पितृदोष से मुक्ति मिलती है।

श्रावणी अमावस्या प्रकृति देवी की आराधना का पर्व है मान्यता है कि वृक्षों में देवी-देवताओं का वास होता है इसलिए इस दिन पौधा लगाना शुभ माना गया है। 

विशेष कामना सिद्धि हेतु उपाय
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1. लक्ष्मी प्राप्त के लिए : तुलसी, आँवला, केल, बिल्वपत्र का वृक्ष लगाये। 

2. आरोग्य प्राप्त के लिए : ब्राह्मी, पलाश, अर्जुन, आँवला, सूरजमुखी, तुलसी लगाये। 

3. सौभाग्य प्राप्त हेतु : अशोक, अर्जुन, नारियल, ब़ड (वट) का वृक्ष लगाये। 

4. संतान प्राप्‍ति के लिए : पीपल, नीम, बिल्व, नागकेशर, गु़डहल, अश्वगन्धा को लगाये।

5. मेधा वृद्धि प्राप्त हेतु : आँक़डा, शंखपुष्पी, पलाश, ब्राह्मी, तुलसी लगाये। 

6. सुख प्राप्त के लिए : नीम, कदम्ब, धनी छायादार वृक्ष लगाये। 

7. आनन्द प्राप्त के लिए : हरसिंगार (पारिजात) रातरानी, मोगरा, गुलाब लगाये।

राशि के अनुसार उपाय
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मेष : लाल राईं या सरसों का तेल किसी गरीब को दान में दें। (राशि ग्रह मंगल अनुसार)- पारस पीपल, लाल चंदन, केशर का पौधा लगाए। 

वृषभ : गौशाला में गाय-बछड़ों के लिए हरा चारा दान करें। (राशि स्वामी शुक्र के लिये)- सुगंधित फूल, पारिजात, औषधीय पौधे, गुलर, शतावरी का पौधा लगाएं। 

मिथुन : उड़द के आटे की गोलियां बनाकर मछलियों के लिए तालाब या नदी में डालें।
(राशि स्वामी बुध के लिये)- मेहंदी, नागपवित्री, तुलसी लटजीरा।

कर्क : काले पत्थर के शिवलिंग पर कच्चे दूध से अभिषेक करें। नि:शक्तों को मीठे चावल खिलाएं। (राशि स्वामी चंद्र के लिये)- सफेद फूल वाले पौधे, गन्ना, सफेद चंदन का पौधरोपण करें।

सिंह : गरीबों को गेहूं दान करें। दुर्गा देवी का पूजन लाल फूलों से करें। (राशि स्वामी सूर्य के लिये)- आंकड़ा, नारियल, बादाम, लाल फूल वाले पौधे लगाए। 

कन्या : तुलसी के 11 पौधे भेंट करें। बरगद के पेड़ में जल अर्पित करें और पेड़ के नीचे बाजरा बिखेर दें। (राशि स्वामी बुध के अनुसार)- मेहंदी, नागपवित्री, तुलसी लटजीरा का पौधा लगाएं।

तुला : शिव या हनुमान मंदिर में दर्शन करें। गरीब कन्याओं को दूध और दही का दान दें। (राशि स्वामी शुक्र के लिये)- सुगंधित फूल, पारिजात, औषधीय पौधे, गुलर, शतावरी का पौधा लगाएं।

वृश्चिक : पीपल के पेड़ में जल चढ़ाकर पूजन करें। शाम को दीप दान करें। (राशि ग्रह मंगल अनुसार)- पारस पीपल, लाल चंदन, केशर का पौधा लगाए। 

धनु : दृष्टिहीन बालक को मीठा दूध पिलाएं। गरीब परिवार में चने की दाल या बेसन से बनी मिठाई दान करें। (राशि स्वामी गुरु के लिये)- पीपल, नागरमोथा, पीली हल्दी, नीम, विष्णुकांता के पौधे लगाए।

मकर : पक्षियों को बाजरा डालें। शनिदेव का पूजन नीले पुष्पों से करें। (राशि स्वामी शनि के अनुसार)- बरगद, पलाश, महुआ,आंवला, शमी, तगर का पौधा लगाएं। 

कुंभ : बहते पानी में सवा पाव चावल और 2 नारियल प्रवाहित करें। शनि मंदिर के बाहर बैठे भिखारियों को भोजन करवाएं।
(राशि स्वामी शनि के अनुसार)- बरगद, पलाश, महुआ,आंवला, शमी, तगर का पौधा लगाएं। 

मीन : मिट्टी के पात्र में शहद भरकर मंदिर में रखकर आएं। चीटियों की बांबी में आटा रखें। (राशि स्वामी गुरु के लिये)- पीपल, नागरमोथा, पीली हल्दी, नीम, विष्णुकांता के पौधे लगाए।
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Monday, August 2, 2021

4 अगस्त का राशिफल जाने क्या है खास

मेष :
प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। किसी वरिष्ठ व्यक्ति के सहयोग से कार्य की बाधा दूर होकर लाभ की स्थिति बनेगी। परिवार के लोग अनुकूल व्यवहार करेंगे। व्यवसाय ठीक चलेगा। नए लोगों से संपर्क होगा। आय में वृद्धि तथा आरोग्य रहेगा। चिंता में कमी होगी। जल्दबाजी न करें।

वृषभ :
नई योजना लागू करने का श्रेष्ठ समय है। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। सामाजिक कार्य सफल रहेंगे। मान-सम्मान मिलेगा। कार्यसिद्धि होगी। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। घर-बाहर प्रसन्नता का माहौल रहेगा। पारिवारिक सहयोग प्राप्त होगा। बड़ा कार्य करने का मन बनेगा। सफलता के साधन जुटेंगे। जोखिम न उठाएं।

मिथुन :
स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। बनते कामों में विघ्न आएंगे। चिंता तथा तनाव रहेंगे। जीवनसाथी से सामंजस्य बैठाएं। फालतू खर्च होगा। कुसंगति से बचें। बेवजह लोगों से मनमुटाव हो सकता है। बेकार की बातों पर ध्यान न दें। आय में निश्चितता रहेगी। मित्रों का सहयोग मिलेगा। जल्दबाजी न करें।

कर्क :
घर-बाहर प्रसन्नतादायक वातावरण रहेगा। नौकरी में चैन महसूस होगा। व्यापार से संतुष्टि रहेगी। संतान की चिंता रहेगी। प्रतिद्वंद्वी तथा शत्रु हानि पहुंचा सकते हैं। मित्रों का सहयोग व मार्गदर्शन प्राप्त होगा। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। यात्रा की योजना बनेगी। प्रसन्नता रहेगी।

सिंह :
दु:खद सूचना मिल सकती है, धैर्य रखें। फालतू खर्च होगा। कुसंगति से बचें। बेकार की बातों पर ध्यान न दें। अपने काम पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। वाणी पर नियंत्रण रखें। चिंता तथा तनाव रहेंगे। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। व्यवसाय ठीक चलेगा। आय में निश्चितता रहेगी। लाभ होगा।

कन्या :
स्थायी संपत्ति के कार्य बड़ा लाभ दे सकते हैं। बेरोजगारी दूर करने के प्रयास सफल रहेंगे। आय में वृद्धि तथा उन्नति मनोनुकूल रहेंगे। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। पार्टनरों का सहयोग समय पर प्राप्त होगा। यात्रा की योजना बनेगी। घर-बाहर कुछ तनाव रहेगा। स्वास्थ्य का ध्यान रखें।

तुला :
पार्टी व पिकनिक का कार्यक्रम बनेगा। स्वादिष्ट व्यंजनों का लाभ मिलेगा। व्यापार-व्यवसाय मनोनुकूल रहेंगे। रचनात्मक कार्य सफल रहेंगे। काम में मन लगेगा। शेयर मार्केट में लाभ रहेगा। नौकरी में सुविधाएं बढ़ सकती हैं। व्यस्तता के चलते स्वास्थ्‍य का ध्यान रखें। धन प्राप्ति सुगमता से होगी।

वृश्चिक :
भूले-बिसरे साथी तथा आगंतुकों के स्वागत तथा सम्मान पर व्यय होगा। आत्मसम्मान बना रहेगा। उत्साहवर्धक सूचना प्राप्त होगी। बड़ा काम करने का मन बनेगा। परिवार के सदस्यों की उन्नति के समाचार मिलेंगे। प्रसन्नता रहेगी। पारिवारिक सहयोग बना रहेगा। किसी व्यक्ति की बातों में न आएं, लाभ होगा।

धनु :
यात्रा मनोनुकूल मनोरंजक तथा लाभप्रद रहेगी। भेंट व उपहार की प्राप्ति संभव है। व्यापार-व्यवसाय से मनोनुकूल लाभ होगा। घर-बाहर सफलता प्राप्त होगी। परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी। काम में लगन तथा उत्साह बने रहेंगे। मित्रों के साथ प्रसन्नतापूर्वक समय बीतेगा।

मकर :
पढ़ाई के स्तर पर कोई आपकी मदद करने का लिए तैयार है। लेकिन हो सकता है कि आप किसी का एहसान लेने के मूड में न हों। सेहत के प्रति आपकी सक्रियता बढ़ने से स्वास्थ्य अच्छा बना रहेगा। परिवार के किसी शादीयोग्य सदस्य के लिए जोड़ीदार की तलाश सफल रहने वाली है। कार्यक्षेत्र में डेडलाइन का प्लान करने के लिए आपको अपने काम की प्राथमिकता तय करनी होगी। शानदार कमाई का अवसर आपके सामने आने वाला है, आर्थिक स्तर में सुधार आएगा।

कुंभ :
प्रेम संबंध को लेकर गंभीर होंगे और इसे आगे ले जाने की पहल कर सकते हैं। कमाने का नया जरिया मिल जाने से अब पैसे को लेकर कोई दिक्कत नहीं रहेगी। दोस्तों के साथ ट्रिप पर जाने की संभावना दिख रही है। आप में से कुछ लोगों के लिए परिवार बहुत बड़ा सपोर्ट सिस्टम बना रहेगा। प्रोफेशनल क्षेत्र में स्थिति आपके अनुकूल रहेगी, कुछ बेहतर किए जाने की उम्मीद है। अपनी संस्था या कंपनी को रिप्रेजेंट करने का अवसर मिल सकता है, बेहद रोमांचित रहेंगे।

मीन :
ऊर्जा और आत्मविश्वास में गजब की वृद्धि होगी। इस अवधि में हमेशा खुश और संतुष्ट दिखाई देंगे। साथ ही यह समय आपको अपने शरीर और फिटनेस के प्रति भी, अधिक सचेत करेगा और आप कोई भी जोखिम लेने में जरा भी संकोच नहीं करेंगे। व्‍यवसाय कर रहे जातकों के लिए समय अत्‍यंत शुभ है। इस दौरान आपको कार्यों की सराहना तो मिलेगी ही साथ ही कुछ बड़े ऑर्डर भी मिल सकते हैं।


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