Monday, July 19, 2021

जन्मतिथि के अनुसार कुछ उपाय

🌹🌸आज हम बात करेंगे के कैसे हम अपनी जन्मतिथि के अनुसार कुछ उपाय करने मात्र से अपनी 💷💰आर्थिक 😣परेशानी दूर कर सकते हैं

आपका जन्म क‌िसी भी महीने में 1, 10, 19, 28 तारीख को है तो आप 💫मूलांक 1 से प्रभाव‌ित 😊व्यक्त‌ि हैं। आपको अपनी 😇क‌िस्मत चमकाने और 🤑आर्थ‌िक उन्नत‌ि के ल‌िए रव‌िवार के द‌िन 🍫🍨मीठा खाना चाहि‌ए। अगर आप 💠रत्न धारण कर सकते हैं तो 
⚛माण‌िक्य आपके ल‌िए लाभप्रद रहेगा 
हर 🌅सुबह ओम ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः 🧘मंत्र का 👌जप करें। सोमवार के द‌िन दूध में जल म‌िलाकर भगवान श‌िव का 
👏अभ‌िषेक करें।

आपका जन्म 2, 11, 20, 29 इन तारीखों में है तो आपका मूलांक 2 है। सोमवार के 🌅द‌िन आपको व्रत रखना चाह‌िए अगर ऐसा नहीं कर पाते हैं तो इस द‌िन कोश‌िश करें क‌ि 🍛नमक नहीं खाएं। 😇भाग्य को चमकाने के ल‌िए आप Ⓜ️मोती या ♓️चंद्रकांत मण‌ि धारण कर सकते हैं।
सोमवार के द‌िन 🌫सफेद वस्‍त्र धारण करना भी आपके ल‌िए 🤗शुभ रहेगा। 
🧘मंत्रों से 😇भाग्य जगाना चाहते हैं तो 'ओम स्रां स्रीं सौं सः चन्द्रमसे नमः' का 👌जप करें।

आपका जन्म 3, 12, 21, 30 इनमें कोई भी है तो आपका मूलांक 3 है। आपको अपनी 😇क‌िस्मत चमकाने के ल‌िए गुरुवार के द‌िन 🟡पीला वस्‍त्र धारण करना चाह‌िए। भगवान व‌‌िष्‍णु की 🤌पूजा और व‌‌िष्‍णु सहस्रनाम का 👌पाठ करें। आपके ल‌िए ♒️टोपाज या ♑️पुखराज रत्न धारण करना 👍शुभ रहेगा।
🧘‍♀ मंत्रों से लाभ पाना चाहते हैं तो 'ओम ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः' मंत्र का 👌जप करें।

आपका जन्म क‌िसी भी महीने में 4, 13, 22, 31 तारीख को है तो आप मूलांक 4 से प्रभाव‌ित हैं। आपको गणेश जी की 👏पूजा करनी चाह‌िए। अगर हर द‌िन नहीं कर पाएं तो बुधवार के द‌िन जरूर करें। आपके ल‌िए ♐️गोमेद रत्न धारण करना लाभप्रद रहेगा। 
🧘मंत्रों से 😇चमकाना चाहें तो 'ओम भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः मंत्र का 👌जप करें।

आपका जन्म 5, 14, 23 तारीख है तो आप मूलांक 5 से प्रभाव‌ित होंगे। बुधवार के द‌िन 🐄गाय को हरी 🌿घास ख‌िलाना चाह‌िए। गणेश स्तोत्र का 📖पाठ लाभप्रद रहेगा। आपके ल‌िए ♎️पन्ना धारण करना 🤩शुभ है। 
🧘‍♀मंत्रों से लाभ पाना चाहते हैं तो 'ओम ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः' मंत्र का 👌जप करें।


आपका जन्म 6, 15, 24 तारीख है तो आप मूलांक 6 से प्रभाव‌ित हैं। शुक्रवार के द‌िन 🍎मीठा 🍱भोजन करें और लक्ष्मी स्तोत्र का 📖पाठ करें। आप ♌️फ‌िरोजा रत्न धारण कर सकते हैं। 
🧘मंत्रों से 😇क‌िस्मत चमकाना चाहते हैं तो आपको 'ओम द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः' मंत्र का 👌जप करें।

आपका जन्म7,16,25 इनमें से कोई है तो आपका मूलांक 7 है आपको अपनी 😇क‌िस्मत चमकाने के ल‌िए 🐕‍🦺काले कुत्ते को 🌮रोटी खिलानी चाह‌िए। न‌ियम‌ित भगवान श‌िव का जलाभ‌िषेक करें। 💠रत्नों में आपके ल‌िए ♋️लहसुन‌िया लाभ द‌िलाने वाला है।
🧘‍♀ मंत्रों की बात करें तो आपको 'क्रां, क्रीं, कौं, सः केतवे नमः' का न‌ियम‌ित 👌
जप करना चाह‌िए।

आपका जन्म 8,17,26  तो आपको शन‌िवार के द‌िन 🌳पीपल में जल देना चाह‌िए। शन‌ि महाराज को 
🪔दीप द‌िखाएं। शन‌िवार के द‌िन 🍗मांस, 🍺मद‌िरा के सेवन से ✋बचें। 💠रत्नों में ☯जामुन‌िया आपके ल‌िए 😇शुभ रहेगा। क‌िसी 👳‍♂ज्योत‌िषी से परामर्श लेकर 
🕎नीलम भी धारण कर सकते हैं। 
🧘‍♀मंत्रों की बात करें तो आपको 'प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः' का 👌जप करना चाह‌िए।

आपका जन्म 9,18,27 तारीख को है  तब आपका मूलांक 9 है। आपको मंगलवार के द‌िन हनुमान जी की 🪔पूजा करनी चाह‌िए। इस द‌िन 🍗मांस, 
🍺मद‌िरा के सेवन से बचें। 💠रत्नों में 
✳️मूंगा धारण करना लाभप्रद रहेगा। 
🧘‍♀मंत्रों से लाभ पाना चाहते हैं तो ' ओम भ्रां भ्रीं भ्रौं सः भौमाय नमः' मंत्र का 
👌जप करें।

Saturday, July 17, 2021

श्राद्ध special

नमस्कार दोस्तों मैं आपका मित्र आचार्य विपिन तिवारी आज आपके सामने एक रोचक जानकारी लेकर आया हूं जिससे सभी लोग डरते हैं वह पित्र दोष ऐसा देखा गया है कि सभी कहते हैं कि हमने पितृदोष का पूजन करा लिया है और फिर भी समाधान नहीं हो रहा है जिसका कारण है पूरी तरीके से जानकारी ना होना कृपया मेरे इस अध्ययन को ध्यान से पढ़ें और समझे।

इसका कारण होता है सही उपाय का न होना अगर किसी को  नागबली की जरूरत है और वो नारायनबली करवाएगा तो परिणाम कहा से प्राप्त होगा

इसके लिए में आपको अपने ज्ञान के अनुसार जानकारी दे रहा हु जो मेने शास्त्रों में पढ़ा है वही बता रहा हु

(1) नारायनबली :-  ये उन पित्रो के लिए करवाई जाती है जिनके बारे में आपको पता हो जैसे आपके परिवार का कोई वो सदस्य जिसके नाम और उसके बारे में आप जानते है और शांत होने के बाद आपके सपने में आता है या किसी अन्य प्रकार से प्रेत योनि में जाकर आपके परिवार में पितृ दोष बना रहा है या आपको कस्ट दे रहा हो तो उनके लिए नारायनबली करवाई जाती है क्योंकि संकल्प में आपको प्रेत का नाम और गोत्र बोलना पढ़ता है चुकी आपको उसके बारे में पता है इस कारण आप नाम गोत्र संकल्प में बोलकर ये उसकी सद्गति के लिए करवा सकते है 

2 नाग बलि:- अगर किसी की कु डली में पंचम भाव मे राहु विराजमान हो या पंचमेश राहु से पीड़ित हो तो नाग दोष बनता है अर्थात पूर्व जन्म में अकारण किसी सांप को मारने से या गर्भ गिरवाने से या बच्चो को प्रताड़ित उस इंसान ने किया था जिसके कारण ये दोष बनता है और इसका परिणाम ये होता है कि सन्तान होने में शमस्या आती है या बार बार गर्भ गिर जाता है या बच्चे मरे हुए पैदा होते है 
इसके निवारण के लिए कृष्ण पक्ष की पंचमी को नाग देवता का पूजन करवाया जाता है उनको भोग वगेरह देकर इस दोष का निवारण करवाया जाता है श्राद्ध कब कराना चाहिए

3 त्रिपिंडी श्राद्ध:- त्रिपिंडी श्राद्ध तब करवाया जाता है जब आपकी कुंडली मे पितृ दोष बना हुआ हो और आपको ये पता नही हो कि हमारी पीढ़ी में किसकी अधोगति के कारण ये बना हुआ है मतलब उस पितृ के बारे में आपको पता नही हो जो अधोगति में है मान लीजिये आपसे पूर्व की 5 वी पीढ़ी में शांत हुआ कोई इंसान अधोगति में हिने के कारण आपकी कुंडलियों में ये दोष बना हुआ है अब आपको उस पितृ का नाम की जानकारी नही है तब ये कराया जाता है इसमें 3 पिंड बनते है एक ब्राह्म जी का दूसरा विष्णु जी का तीसरा महादेव का 
मतलब अगर वो आत्मा सात्विक हुई तो ब्रह्मा जी उसकी सद्गति करे राजसिक हुई तो विष्णु भगवान उसकी सद्गति करे और तामसिक(भूत प्रेत गन्दी योनि)  में हुई तो भगवान शिव उसकी सद्गति करे 

पितृ दोष निवारण श्राद्ध ये श्राद्ध तीनो श्राधो के साथ अनिवार्य होता है इसको करने का मतलब होता है कि हम आजन पित्रो से अब तक कि हुई गलतियों की क्षमा मांगते है उन्हें वचन देते है कि आइंदा नियम पूर्वक धर्म पूर्वक जीवन जिएंगे समय समय पर उनको भोग प्रदान करेंगे 
हमारी कमाई का कुछ हिस्सा उनके लिए रखेंगे

जी हां आप जो भी कमाते है उसमे इनका हिस्सा होता है क्योंकि ये जीवन उन्ही के देंन है अगर आप वो हिस्सा उनके लिए नही निकलते तो वो पितृ अपने हिस्से को अस्पताल कोर्ट बीमारियों के जरिये निकलवाते है 

कुछ ज्यादा आधुनिक लोग ये कहते है कि ये सब धंधा है ऐसे कोई दोष नही होते है बन्धुओ अनपढ़ में भी नही हु अच्छी शिक्षा मेंने हासिल की हुई है ईश्वर की कृपा के कारण में अध्यात्म के मार्ग से जुड़ा हुआ हूं ।

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Friday, July 16, 2021

भगवान विष्णु की महिमा

"निराली है भगवान विष्णु की महिमा"

एक नगर में एक सेठ व सेठानी रहते थे और सेठानी रोज विष्णु भगवान की पूजा करती थी। सेठ को उसका पूजा करना बिलकुल अच्छा नहीं लगता था। इसी वजह से एक दिन सेठ ने सेठानी को घर से निकाल दिया। घर से निकलने पर वह जंगल की ओर गई तो देखा चार आदमी मिट्टी खोदने का काम कर रहे थे। उसने कहा कि मुझे नौकरी पर रख लो। उन्होंने उसे रख लिया लेकिन मिट्टी खोदने से सेठानी के हाथों में छाले पड़ गए और उसके बाल भी उड़ गए।

वह आदमी कहते हैं कि बहन लगता है तुम किसी अच्छे घर की महिला हो, तुम्हें काम करने की आदत नहीं है। तुम ये काम रहने दो और हमारे घर का काम कर दिया करो। वह चारों आदमी उसे अपने साथ घर ले गए और वह चार मुट्ठी अनाज लाते और सभी बाँटकर खा लेते। एक दिन सेठानी ने कहा कि कल से आठ मुठ्ठी अनाज लाना। अगले दिन वह आठ मुठ्ठी अनाज लाए और सेठानी पड़ोसन से आग माँग लाई। उसने भोजन बनाया, विष्णु भगवान को भोग लगाया फिर सभी को खाने को दिया। सारे भाई बोले कि बहन आज तो भोजन बहुत स्वादिष्ट बना है। सेठानी ने कहा कि भगवान का जूठा है तो स्वाद तो होगा ही।

सेठानी के जाने के बाद सेठ भूखा रहने लगा और आस-पड़ोस के सारे लोग कहने लगे कि ये तो सेठानी के भाग्य से खाता था। एक दिन सेठ अपनी सेठानी को ढूंढने चल पड़ा। उसे ढूंढते हुए वह भी उस जंगल में पहुंच गया जहाँ वह चारों आदमी मिट्टी खोद रहे थे। सेठ ने उन्हें देखा तो कहा कि भाई मुझे भी काम पर रख लो। उन आदमियों ने उसे काम पर रख लिया लेकिन मिट्टी खोदने से उसके भी हाथों में छाले पड़ गए और बाल उड़ने लगे।

उसकी यह हालत देख चारों बोले कि तुम्हे काम की आदत नहीं है, तुम हमारे साथ चलो और हमारे घर में रह लो। सेठ उन चारों आदमियों के साथ उनके घर चला गया और जाते ही उसने सेठानी को पहचान लिया लेकिन सेठानी घूँघट में थी तो सेठ को देख नही पाई। सेठानी ने सभी के लिए भोजन तैयार किया और हर रोज की भाँति विष्णु भगवान को भोग लगाया। उसने उन चारों भाईयों को भोजन परोस दिया लेकिन जैसे ही वह सेठ को भोजन देने लगी तो विष्णु भगवान ने उसका हाथ पकड़ लिया।

भाई बोले कि बहन ये तुम क्या कर रही हो़? वह बोली – मैं कुछ नहीं कर रही हूँ, मेरा हाथ तो विष्णु भगवान ने पकड़ लिया है। भाई बोले – हमें भी विष्णु भगवान के दर्शन कराओ? उसने भगवान से प्रार्थना की तो विष्णु जी प्रकट हो गए, सभी ने दर्शन किए। सेठ ने सेठानी से क्षमा मांगी और सेठानी को साथ चलने को कहा। भाईयों ने अपनी बहन को बहुत सा धन देकर विदा किया। अब सेठानी के साथ सेठ भी भगवान विष्णु की पूजा
जय श्री सीता राम

Tuesday, April 27, 2021

कुंडली मिलान में कब निरस्त हो जाता है नाड़ी दोष, जानिए 3 नियम

कुंडली मिलान में कब निरस्त हो जाता है नाड़ी दोष, जानिए 3 नियम

हिंदू धर्म में विवाह से पहले अष्टकूट यानी गुण मिलान का खासा महत्व है। इसमें वर्ण, वश्य, तारा, योनी, ग्रह मैत्री, गण, भकूट और नाड़ी के आधार पर वर-वधू के गुणों का मिलान किया जाता है। इसमें सबसे ज्यादा अहम नाड़ी है। इसकी अहमियत इस बात से पता चलती है कि ज्यादा गुण मिलने के बावजूद अगर नाड़ी दोष है तो विवाह वर्जित बताया जाता है। हालांकि अगर संभावित वर और वधू की कुंडली में तीन शर्तों में से एक भी पूरी हो रही हो तो नाड़ी दोष निरस्त हो जाता है। कुंडली में चंद्रमा की नक्षत्र में स्थिति के आधार पर नाड़ी का पता चलता है। कुल नक्षत्र 27 होते हैं, इस प्रकार हर नाड़ी के 9-9 नक्षत्र होते हैं। 

वैदिक ज्योतिष में नाड़ी 3 प्रकार की होती हैं- आदि, मध्य और अन्त्य नाड़ी

आदि या आद्य नाड़ी- ज्येष्ठा, मूल, आर्द्रा, पुनर्वसु, उत्तरा फाल्गुनी,हस्त, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद और अश्विनी नक्षत्र की गणना इस नाड़ी में की जाती है।

मध्य नाड़ी- पुष्य, मृगशिरा, चित्रा, अनुराधा, भरणी, घनिष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, पूर्वा फाल्गुनी और उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र की गणना मध्य नाड़ी में होती है।

अन्त्य नाड़ी- स्वाति, विशाखा, कृतिका, रोहिणी, अश्लेषा, मघा, उत्तारषाढ़ा, श्रवण और रेवती नक्षत्रों की गणना अन्त्य नाड़ी में की जाती है।

कैसे लगता है नाड़ी दोष
जब संभावित वर और वधू के जन्म नक्षत्र एक ही नाड़ी में आते हैं, तब यह दोष लगता है। इस दोष के चलते गुण मिलान में 8 गुणों की हानि होती है। इस दोष के लगने से विवाह को वर्जित बताया जाता है। इस दोष के बावजूद विवाह होने पर विवाह में अलगाव, मृत्यु और दुखमय जीवन की आशंकाएं होती हैं।
किन स्थितियों में निरस्त हो जाता है नाड़ी दोष

यदि संभावित वर और वधू का जन्म नक्षत्र समान हो, लेकिन दोनों के चरण अलग-अलग हों तो नाड़ी दोष नहीं लगता है।

यदि दोनों की राशि समान हो, लेकिन जन्म नक्षत्र अलग-अलग हों तो नाड़ी दोष नहीं लगता है।

यदि दोनों के जन्म नक्षत्र समान हों, लेकिन राशि अलग-अलग हों तो नाड़ी दोष नहीं लगता  ।

Call & Whatsapp Details :9990302395,9015848532

Friday, April 16, 2021

पाप कहाँ-कहाँ तक जाता है?

 *पाप कहाँ-कहाँ तक जाता है?*

एक बार एक ऋषि ने सोचा कि लोग गंगाजी में पाप धोने जाते हैं तो इसका मतलब हुआ कि सारे पाप गंगाजी में समा गए और गंगाजी भी पापी हो गईं!
अब यह जानने के लिए तपस्या की, कि पाप कहाँ जाता है?
तपस्या करने के फलस्वरूप देवता प्रकट हुए।

ऋषि ने पूछा - भगवन, जो पाप गंगाजी में धोया जाता है वह पाप कहाँ जाता है?

भगवन ने कहा - चलो, गंगाजी से ही पूछते हैं।

दोनों लोग गंगाजी के पास गए और उनसे कहा - हे गंगे! जो लोग तुम्हारे यहाँ पाप धोते है तो इसका मतलब आप भी पापी हुईं!

गंगाजी ने कहा - मैं क्यों पापी हुई? मैं तो सारे पापों को ले जाकर समुद्र को अर्पित कर देती हूँ।

अब वे लोग समुद्र के पास गए और उनसे बोले - हे सागर! गंगाजी जो पाप आपको अर्पित कर देती हैं तो इसका मतलब आप भी पापी हुए!

समुद्र ने कहा - मैं क्यों पापी हुआ? मैं तो सारे पापों को लेकर भाप बनाकर बादल बना देता हूँ।

अब वे लोग बादल के पास गए, और उनसे बोले - हे बादलों! समुद्र जो पापों को भाप बनाकर बादल बना देते हैं तो इसका मतलब आप पापी हुए!

बादलों ने कहा - हम क्यों पापी हुए? हम तो सारे पापों को पानी के रूप में बरसाकर वापस धरती पर भेज देते हैं, जिससे अन्न उपजता है, जिसको मानव खाता है। उस अन्न में जो अन्न जिस मानसिक स्थिति से उगाया जाता है और जिस वृत्ति से प्राप्त किया जाता है, जिस मानसिक अवस्था में खाया जाता है, उसी अनुसार मानव की मानसिकता बनती है।

✒ शायद इसीलिये कहते हैं - *जैसा खाए अन्न, वैसा बनता मन*
अन्न को जिस वृत्ति (कमाई) से प्राप्त किया जाता है और जिस मानसिक अवस्था में खाया जाता है वैसे ही विचार मानव के बन जाते हैं। इसीलिये सदैव भोजन शांत अवस्था में पूर्ण रुचि के साथ करना चाहिए और कम से कम अन्न जिस धन से खरीदा जाए वह धन भी श्रम का होना चाहिए। 🌺🌹🌺
जय श्री सीता राम
Jyothish Acharya Vipin Tiwari 
Call & Whatsapp 9990302395,9015848532

Thursday, April 15, 2021

जानिए मां दुर्गा के दिव्यास्त्र किस बात का हैं प्रतीक

*जानिए मां दुर्गा के दिव्यास्त्र किस बात का हैं प्रतीक*

शक्ति की अधिष्ठात्री देवी की संरचना तमाम देवीदेवताओं की संचित शक्ति के द्वारा हुई है. जिस तरह तमाम नदियों के संचित जल से समुद्र बनता है, उसी तरह भगवती दुर्गा विभिन्न देवी देवताओं के शक्ति समर्थन से महान बनी हैं. देवताओं ने मां दुर्गा को दिव्यास्त्र प्रदान किये.
इस आद्याशक्ति को शिव ने त्रिशूल, विष्णु ने चक्र, वरुण ने शंख, अग्नि ने शक्ति, वायु ने धनुष बाण, इन्द्र ने वज्र और यमराज ने गदा देकर अजेय बनाया. दूसरे देवताओं ने मां दुर्गा को उपहार स्वरूप हार चूड़ामणि, कुंडल, कंगन, नुपूर, कण्ठहार आदि तमाम आभूषण दिए. हिमालय ने विभिन्न रत्न और वाहन के रूप में सिंह भेंट किया.

1.शंख
दुर्गा मां के हाथ में शंख प्रणव का या रहस्यवादी शब्द ‘ओम’ का प्रतीक है जो स्वयं भगवान को उनके हाथों में ध्वनि के रूप में होने का संकेत करता है.
2.धनुषबाण
धनुष बाण ऊर्जा का प्रतिनिधित्त्व करते हैं दुर्गा मां के एक ही हाथ में इन दोनों का होना इस बात का संकेत है कि मां ने ऊर्जा के सभी पहलुओं एवं गतिज क्षमता पर नियंत्रण प्राप्त किया हुआ है.
3.बिजली और वज्र
ये दोनों दृढ़ता के प्रतीक हैं. और दुर्गा मां के भक्तों को भी वज्र की भांति दृढ़ होना चाहिए जैसे बिजली और वज्र जिस भी वस्तु को छुती है उसे ही नष्ट एवं ध्वस्त कर देती है अपने को बिना क्षति पहुंचाए. इसी तरह माता के भक्तों को भी अपने पर विश्वास करके किसी भी कठिन से कठिन कार्य पर खुद को क्षति पहुंचाए बिना करना चाहिए
4.कमल के फूल
माता के हाथ में जो कमल का फूल है वह पूर्ण रूप से खिला हुआ नहीं है इससे तात्पर्य है कि कमल सफलता का प्रतीक तो है परन्तु सफलता निश्चित नहीं है. कमल का एक पर्यायवाची पंकज भी है अर्थात् संसार में कीचड़ के बीच भक्तों की आध्यात्मिक गुणवत्ता के सतत् विकास के लिए खड़ा है कमल.
5.सुदर्शन चक्र
सुदर्शन चक्र जो दुर्गा मां की तर्जनी के चारों ओर घूम रहा है. बिना उनकी अंगुली को छुए हुए यह प्रतीक है इस बात का कि पूरा संसार मां दुर्गा की इच्छा के अधीन है और उन्हीं के आदेश पर चल रहा है. माता इस तरह के अमोघ अस्त्रशस्त्र इसलिए प्रयोग करती हैं ताकि दुनिया से अधर्म, बुराई और दुष्टों का नाश हो सके और सभी समान रूप से खुशहाली से जी सकें.
6.तलवार
तलवार जो दुर्गा मां ने अपने हाथों में पकड़ी हुई है वह ज्ञान की प्रतीक है वह ज्ञान जो तलवार की धार की तरह तेज एवं पूर्ण हो. वह ज्ञान जो सभी शंकाओं से मुक्त हो तलवार की चमक का प्रतीक माना जाता है.
7. त्रिशूल
मां दुर्गा का त्रिशूल अपने आप में तीन गुण समाए हुए हैं. यह सत्व, रजस एवं तमस गुणों का प्रतीक है. और वह अपने त्रिशुल से तीनों दुखों का निवारण करती हैं चाहे वह शारीरिक हो, चाहे मानसिक हो या फिर चाहे आध्यात्मिक हो.
8.सिंह सवारी
मां दुर्गा शेर पर एक निडर मुद्रा में बैठी हैं जिसे अभयमुद्रा कहा जाता है जो संकेत है डर से स्वतंत्रता का, जगत की मां दुर्गा अपने सभी भक्तों को बस इतना ही कहती हैं, अपने सभी अच्छे बुरे कार्यों एवं कर्तव्यों  को मुझ पर छोड़ दो और मुक्त हो जाओ अपने डर से अपने भय से.

Jyothish Acharya Vipin Tiwari 

2 जून 2026 से गुरु का कर्क राशि में उदय – सभी 12 राशियों पर प्रभाव

2 जून 2026 से गुरु का कर्क राशि में उदय – सभी 12 राशियों पर प्रभाव 2 जून 2026 को देवगुरु बृहस्पति (गुरु) कर्क राशि में उदित हो र...